1. कम शुक्राणु संख्या (Low Sperm Count)
अगर वीर्य में शुक्राणु की संख्या 15 मिलियन/ml से कम है, तो इसे कम शुक्राणु संख्या कहा जाता है।
लक्षण: पतला वीर्य, गर्भधारण में कठिनाई।
इलाज: जीवनशैली में बदलाव, दवाएं, सर्जरी।
2. हार्मोनल असंतुलन
टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोनों की कमी से शुक्राणु उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
संकेत: यौन इच्छा में कमी, थकान, स्तंभन दोष।
उपचार: हार्मोन थेरेपी, खानपान में सुधार।
3. प्रजनन नली में रुकावट (Blockages)
शुक्राणुओं को वीर्य में शामिल होने से रोकने वाली रुकावटें गर्भधारण को रोकती हैं।
इलाज: सर्जरी या ART तकनीकें जैसे IVF, ICSI।
4. जीवनशैली के कारण
धूम्रपान, शराब, मोटापा, और नशीली दवाओं का सेवन पुरुष प्रजनन क्षमता को कम करता है।
समाधान: हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं, व्यायाम करें, संतुलित आहार लें।
5. आनुवांशिक विकार (Genetic Disorders)
जैसे क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम, जिससे शुक्राणु उत्पादन में समस्या आती है।
जांच: जेनेटिक टेस्टिंग।
इलाज: आर्टिफिशियल रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से मदद मिल सकती है।